2009-07-29

How can a society that exists on instant mashed potatoes, packaged cake mixes, frozen dinners, and instant cameras teach patience to its young?

I have read this on Internet some days ago. But this is really a truth. Nowadays patience is nowhere. Point to think and act upon.

2009-07-27

खामोशी


खामोशी की भी कभी सुना करो,
इसमें भी एक बात होती है.
कभी गहराई को समझा करो,
इसमें भी आवाज़ होती है.
तुम तो चल देते हो यूं ही मुहँ मोड़ कर,
हर सुबह की इक सुहानी रात होती है.
जब चाँद आसमान पर आता है ,
हर दिल में कोई आस होती है.
कहना है आंखों से सब कुछ,
इसमें दिल की हाँ होती है .



यह जीवन की डोर किसने बांधी है,

सांसो को पिरो कर बनाई इक माला .

चलते जाते है हम यूँ ही आगे आगे,

चाहे हो कहीं अँधेरा या उजाला।

क्या पाते हैं उजाले से , क्या खो देते हैं अन्देरे में?

बस अंको के हिसाब से रहते हैं एक घेरे में।

एक दिन , दो साल या पन्द्रेह बरस,

कोई पल पाते हैं क्या इसमे सरस?

फिरते है किन इच्छायों के लिए ,

जिन्होंने केवल दी एक मृगत्रिष्णा.

2009-07-26

एक बार एक भिक्षु भिक्षा लेने एक गाँव में गया ।एक घर के दरवाज़े पर भिक्षा मांग रहा था । दोपहर का समय था। काफी देर के बाद दरवाज़ा न खुलने पर उसने ज़ोर से दरवाजा खटखटाया । तब एक औरत ने दरवाज़ा खोला और भड़क कर कहा " क्या है? दिन में भी चैन नही लेने देते । जब मन करता है आ जाते हो भिक्षा मांगने । अब तुम्हारे लिए ही तो बैठे नही है। " भिक्षु चुप चाप खड़ा रहा। फिर भोला " माई। कुछ भी भिक्षा दे दो। औरत फिर चिल्लाये " तुम्हे शर्म नही आती? जाओ कहीं और भिक्षा मांगो। एक ही घर नही है इस गाँव में। हट्टे कटते हो कर भिक्षा लेते हो। " भिक्षु भोला" माई। हम तो गुरुकुल में पढ़ते है। यह भिक्षा से कुछ अनाज या फल लाना हमारी दिन चर्या का हिस्सा है "। फिर औरत ने कहा " जाओ जाओ कहीं और जाओ"। भिक्षु भोला" अच्छा माई। इश्वार सबका भला करे"। कह कर जाने लगा। तब फिर औरत ने हैरान होकर कहा " एक बात बोलो, मैंने इतना कुछ कहा तुम फिर भी शांत रहे। तुम्हे गुस्सा नही आया"। तब भिक्षु बोला" माई । जो मैंने ग्रहण ही नही किया । तो मेरा कैसा। तुमने क्रोध में जो कहा मैंने ग्रहण ही नही किया। तो मुझ में वो प्रकृति कहाँ से आएगी"। औरत आपने किए पर बहुत पछतावा था।

2009-07-20

फिर जला दी एक और नारी

क्यों तुम चिल्लाती रही,
क्यों आवाज़ दी, बुलाती रही.
यहाँ कौन सुनेगा तुम्हारी आवाज़,
इस समाज को जब बेटी पर नही नाज़.
फिर तुमको जला दिया मिलकर तेरे ही घर में,
दहेज़ के लोभी वोह तीन चार थे उसी घर में.
क्यों रास नही आया तुम्हारा हँसना हँसाना ,
धू धू कर जल गई एक और अबला और ख़तम हुआ एक और फ़साना.

2009-07-15

दिल की हार

यह कैसा साथ है ki हम साथ नही,
यह कैसी बात है कि वो बात नही।
जीवन तो चला जा रहा है धारा कि तरह।
पर इस जीवन का कोई आधार नही।
हाथ तो नही पकड़ा है तुमने मेरा,
पर भीड़ में साथ हो मेरे ,
क्या यह मेरे दिल कि हार नही।

2009-07-09

remember those who serves you

Important Lesson – Always remember those who serve.

A 10-year-old boy entered a hotel coffee shop and sat at a table. A waitress put a glass of water in front of him.

“How much is an ice cream sundae?” he asked. “Fourteen Rupees,” replied the waitress. The little boy pulled is hand out of his pocket and studied the coins in it.

“Well, how much is a plain dish of ice cream?” he inquired.

By now more people were waiting for a table and the waitress was growing impatient.

“Twelve Rupees,” she brusquely replied

The little boy again counted his coins.

“I’ll have the plain ice cream,” he said.

The waitress brought the ice cream, put the bill on the table and walked away. The boy finished the ice cream, paid the cashier and left. When the waitress came back, she began to cry as she wiped down the table. There, placed neatly beside the empty dish, were two rupees.

You see, he couldn’t have the sundae, because he had to have enough left to leave her a tip.

मीठे बोल

दो मीठे बोल किसी को बोलिए उसका खून बढ जाएगा आपका रक्तदान हो जायेगा